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वायदा अनुबंध कैसे व्यापार करें?

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कॉफी की चुस्की के साथ अब पैसा बनाने का भी मौका, NCDEX ने रॉबस्टा चेरी कॉफी में शुरू किया वायदा कारोबार

भारत में कॉफी का लगभग समूचा उत्पादन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में ही होता है। हालांकि अब देश के कुछ दूसरे इलाकों जैसे आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और मणिपुर में भी कॉफी की खेती शुरू हुई है

दुनिया भर में करीब 1 करोड़ टन कॉफी उत्पादन होता है और तकरीबन 350,000 टन सालाना उत्पादन के साथ भारत की वैश्विक कॉफी उत्पादन में 3.5-4% हिस्सेदारी है

नेशनल कमोडिटीज एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) 30 सितंबर को रॉबस्टा AB कॉफी का वायदा कारोबार शुरू करने वाली है। शुरुआत में फरवरी 2023, मार्च 2023 और अप्रैल 2023 में एक्सपायर होने वाले मंथली वायदा कॉन्ट्रैक्ट मुहैया कराए जाएंगे। ये सभी कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ डिलीवरी वाले होंगे। कॉफी की डिलीवरी कर्नाटक के कुशालनगर से होगी।

दुनिया भर में दो तरह के कॉफी का प्रोडक्शन होता है। ये हैं अरेबिका और रॉबस्टा कॉफी। अरेबिका कॉफी की ट्रेडिंग अमेरिका ICE (Intercontinental Exchange) पर होता है। जबकि रॉबस्टा कॉफी की ट्रेडिंग ICE यूरोप पर होता है। गेहूं और कोको के बाद यूरोप में कॉफी की ट्रेडिंग सबसे ज्यादा होती है। इस मार्केट में ब्राजील सबसे बड़ा देश है। इसके बाद वियतनाम, कोलंबिया है। सातवें नंबर पर भारत है। 2021/22 में भारत में 369000 टन कॉफी प्रोडक्शन हुआ जिसका 70% एक्सपोर्ट होता है।

NCDEX के MD और CEO अरुण रास्ते ने कहा कि अब कॉफी का बाजार सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं है। रास्ते ने कहा कि अब एक अच्छी बात है कि इसका दायरा दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहेगा। रास्ते ने कहा, "जापान सरकार ने कहा है कि मणिपुर में उगाई जाने वाली सारी कॉफी वह खरीद लेगी।" इसके साथ ही उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में भी कॉफी का प्रोडक्शन बढ़ेगा।

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क्या होगा वायदा कारोबार से फायदा?

NCDEX के MD और CEO अरुण रास्ते ने कहा, 'कॉफी उत्पादन में दक्षिण भारतीय राज्यों के छोटे किसान जुड़े हैं। ऐसे में उनपर वैश्विक बाजार से सीधे जुड़े घरेलू बाजारों में कीमतें ऊपर-नीचे जाने का जोखिम मंडराता रहता है। इन नए कॉन्ट्रैक्ट से देसी उत्पादकों को व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर मूल्य के जोखिम से बचने का मौका मिलेगा। साथ ही इस कमोडिटी की वैश्विक स्तर पर बड़ी पैठ है। लिहाजा कॉफी के उत्पादन और कारोबार से जुड़े तमाम लोगों को बेंचमार्क कीमतों का स्वदेशी जरिया मुहैया कराने और आत्मनिर्भर करने में यह अहम कदम होगा। साथ ही हमें उम्मीद है कि इस अनुबंध से व्यापार की जटिलता खत्म होगी और यह आसान बन जाएगा।"

क्यों खास है कॉफी में वायदा कारोबार?

इस कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत NCDEX के लिहाज से खास है क्योंकि इसके साथ ही एक्सचेंज पहली बार दक्षिण भारत में कदम रख रहा है। भारत में कॉफी का लगभग समूचा उत्पादन कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में ही होता है। हालांकि अब देश के कुछ दूसरे इलाकों जैसे आंध्र प्रदेश, उड़ीसा और मणिपुर में भी कॉफी की खेती शुरू हुई है।

कॉन्ट्रैक्ट की एक दिन में उतार या चढ़ाव की अधिकतम सीमा 6% (4%+2%) होगी। यानि कीमत 4% ऊपर या नीचे होते ही 15 मिनट के लिए ट्रेडिंग रोक दी जाएगी। उसके बाद सत्र खत्म होने तक कीमत में पहले के प्राइस मूवमेंट की ही दिशा में और 2% तक उतार या चढ़ाव की इजाजत दी जा सकती है। अनुबंध का लॉट साइज कमोडिटी के सामान्य कारोबार की तर्ज पर एक मीट्रिक टन तय किया गया है।

NCDEX के चीफ बिजनेस ऑफिसर कपिल देव ने कहा, "दुनिया भर में कॉफी सबसे ज्यादा ट्रेडिंग वाला सॉफ्ट-कमोडिटी अनुबंध रहा है। लेकिन देश में हेजिंग का कोई उपाय नहीं होने के कारण भारतीय किसानों के पास ऐसी गतिविधियों का फायदा उठाने के बहुत कम विकल्प थे। कीमत का पता लगाने के लिए भी उन्हें अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजों पर ही पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था। चूंकि भारत 60% उपज का निर्यात करता है, इसलिए स्वदेशी कॉफी का वायदा कॉन्ट्रैक्ट देश में ही मूल्य जोखिम संभालने के लिहाज से निर्यातकों के लिए वरदान होगा।"

दुनिया भर में करीब 1 करोड़ टन कॉफी उत्पादन होता है। भारत की वैश्विक कॉफी उत्पादन में 3.5-4% हिस्सेदारी है। देश के कुल उत्पादन में कर्नाटक की 71% हिस्सेदारी है। उसके बाद केरल की 21% और तमिलनाडु की 5% भागीदारी है। लगभग 65% उत्पादन का निर्यात कर दिया जाता है और बाकी की खपत देश में होती है। देसी बाजार में भी कॉफी की मांग बढ़ रही है और इसीलिए आंध्र प्रदेश, ओडिशा तथा पूर्वोत्तर राज्यों के गैर पारंपरिक इलाकों में भी इसके बगान बढ़ रहे हैं।

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कपास किसानों के लिए बड़ी खबर सेबी ने कपास वायदा कारोबार पर लगाई रोक

मंडियों में कपास की नई फसल की आवक शुरू होते ही किसानों के लिए अच्छी खबर आई है. बाजार नियामक सेबी ने कपास वायदा कारोबार पर रोक लगा दी है। सेबी ने मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर कपास वायदा कारोबार एक महीने के लिए स्थगित कर दिया है।

देश के सबसे बड़े कमोडिटी एक्सचेंज और कपड़ा मंत्रालय, कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और विभिन्न उद्योग निकायों के अधिकारियों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ बाजार निदेशक द्वारा 26 अगस्त को मुंबई में आयोजित एक बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया।

एमसीएक्स ने एक सर्कुलर में कहा कि एक्सचेंज ने कॉटन फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट्स के नियमों में संशोधन किया है। तदनुसार, 29 अगस्त 2020 से जनवरी 2023 में समाप्त होने वाले कपास अनुबंध में किसी भी नई स्थिति की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसमें वर्तमान में कोई खुला हित नहीं है।

फरवरी 2023 और उसके बाद समाप्त होने वाले कपास अनुबंधों को अस्थायी रूप से व्यापार के लिए तब तक लॉन्च नहीं किया जाएगा जब तक कि आगे की मंजूरी या स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हो जाता। अंत में यह जोड़ा गया कि खुले हित के साथ चल रहे अन्य कपास अनुबंधों के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिसे सदस्य और व्यापारी नोट कर सकते हैं।

यहां यह ध्यान दिया जा सकता है कि कपास वर्तमान में सबसे गर्म वस्तु के रूप में उभरा है। घरेलू बाजार में हाजिर कपास की कीमतें पिछले एक साल में दोगुनी होकर रु. 1 लाख ने ऐतिहासिक ऊंचाई को छुआ था।

महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में भारी बारिश के कारण कीटों के प्रकोप और फसल के नुकसान के कारण वित्तीय वर्ष 2023 के लिए भारत के कपास उत्पादन का अनुमान 315 लाख गांठ तक घटा दिया गया है।

वैश्विक बाजारों में कपास की कीमतें सबसे बड़े कपास उत्पादक देशों में से एक के बाद बढ़ी हैं, अमेरिका ने भी वित्तीय वर्ष 2023 के लिए अपने उत्पादन अनुमान को 30 लाख गांठ से घटाकर 126 लाख गांठ कर दिया है।

कमोडिटी बाजार : धातुओं की कीमतों में उछाल, सीसा और चांदी में सुधार

एमसीएक्स में सीसा के फरवरी महीने में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 10 पैसे अथवा 0.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 144.15 रुपये प्रति किग्रा हो गई.

वायदा बाजार में सौदों के लिवाली के चलते सीसा, तांबा, निकेल और चांदी की कीमतों में सुधार देखा गया.

कमोडिटी बाजार में बुधवार को धातु जिंसों के कारोबार में तेजी देखने को मिली. सौदों के लिवाली के चलते सीसा, तांबा, निकेल और चांदी की कीमतों में सुधार देखा गया.

बात सीसा की करें तो हाजिर बाजार की बढ़ती मांग तथा सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच सटोरियों ने अपने सौदों के आकार को बढ़ाया जिससे वायदा कारोबार में बुधवार को सीसा की कीमत 0.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 144.15 रुपये प्रति किग्रा हो गई.

एमसीएक्स में सीसा के फरवरी महीने में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 10 पैसे अथवा 0.07 प्रतिशत की तेजी के साथ 144.15 रुपये प्रति किग्रा हो गई जिसमें 1,031 लॉट के लिए कारोबार हुआ.

तांबा वायदा कीमतों में सुधार
सकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच हाजिर बाजार की मांग में तेजी के कारण सटोरियों ने ताजा सौदों की लिवाली की जिससे वायदा कारोबार में तांबा की कीमत 0.34 प्रतिशत की तेजी के साथ 434.05 रुपये प्रति किग्रा हो गई.

एमसीएक्स में तांबा के फरवरी महीने में डिलीवरी वाले अनुबंध की कीमत 1.45 रुपये अथवा 0.34 प्रतिशत की तेजी के साथ 434.05 रुपये प्रति किग्रा हो गई जिसमें 1,469 लॉट के लिए कारोबार हुआ.

निकेल वायदा कीमतों में तेजी
हाजिर बाजार में एलॉय निर्माताओं की मांग में तेजी आने के अलावा मजबूत वैश्विक संकेतों के कारण वायदा कारोबार में बुधवार को निकेल की कीमत 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 876.20 रुपये प्रति किग्रा हो गई.

एमसीएक्स में निकेल के फरवरी महीने में डिलीवरी वाले अनुबंध की वायदा अनुबंध कैसे व्यापार करें? कीमत 4.40 रुपये अथवा 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 876.20 रुपये प्रति किग्रा हो गई जिसमें 1,801 लॉट के लिए कारोबार हुआ.

चांदी मजबूत
मजबूत वैश्विक रुख के साथ प्रतिभागियों के सौदे बढ़ाने से बुधवार को वायदा कारोबार में चांदी 0.17 प्रतिशत बढ़कर 39,583 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में फरवरी डिलिवरी वाली चांदी 69 रुपये यानी 0.17 प्रतिशत बढ़कर 39,583 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. इसमें 2,181 लॉट का कारोबार हुआ.

मार्च डिलिवरी वाली चांदी 52 रुपये यानी 0.13 प्रतिसत बढ़कर 39,555 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई. इसमें 561 लॉट का कारोबार हुआ.

बाजार जानकारों ने कहा कि प्रतिभागियों के सौदे बढ़ाने के साथ वैश्विक बाजार में कीमती धातु में मजबूत रुख का असर वायदा कारोबार में भी चांदी में देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में चांदी 0.19 प्रतिशत बढ़कर 15.80 डॉलर प्रति औंस पर रही.

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