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किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना

किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना
Photo:INDIA TV

Best Mutual Fund Choose Criteria Hindi 2021

अगर हम म्युचुअल फंड कि बातकरें तो आज के समय में 2000 से भी ज्यादा म्युचुअल फंड मार्केट में उपलब्ध हैं. कहते हैं Best Mutual fund Kaise Chune Hindi 2021 और सही कैसे चुनें? और सबसे बेस्ट म्युचुअल फण्ड कौन सा हैं ?

अगर हम आम आदमी की बात करें तो यह काफी चर्चा का विषय हैं, और यह सवाल सबसे पहले हमारे दिमाग में आता हैं जब हम म्यूच्यूअल फंड में इन्वेस्टमेंट करने कि सोचते हैं, जिसे शेअर मार्केट का गणित नहीं पता होता वह Mutual Fund कि और ही देखते हैं.

आज हम इसी के बारे में इस आर्टिकल में विस्तार से चर्चा करनेवाले हैं, अगर आप यह पुरा पढ़ लेते हैं तो आपको म्यूचुअल फंड कौन सा लेना योग्य होगा यह कभी भी ख्याल नहीं आयेगा.

म्युचूअल फंड क्या होता हैं?

यह एक सामुहिक निवेश होता हैं, म्युचूअल यानी आपसी और फंड यानी निवेश. अलग अलग निवेशकों द्वारा एक बड़ी राशी कि निवेश को एक व्यक्ती द्वारा अलग अलग या किसी एक सेक्टर पर निवेश किया जाता हैं जैसे शेयर मार्केट सेक्टर हो गया , असेट फंड हो गया ऐसे करके निवेश किया जाता हैं.
जिसे शेयर मार्केट का ज्ञान नहीं होता और जिसे बैंक से ज्यादा रिटर्न्स चाहिते होते हैं या तो शेयर मार्केट में निवेश करने कि ज्यादा रिस्क नहीं देनी होती वह ज्यादातर म्यूचुअल फंड को सही मानते हैं, लेकिन इससे पहले यह सवाल आता है कि 2000+ से भी म्यूचुअल फंड मार्केट में हैं हमे किसमे निवेश करना योग्य होगा तो इसी की विस्तार से हम चर्चा करेंगे चलिये देखते हैं.

Best Mutual fund choose criteria hindi

सही म्युचूअल चुनने के लिये इन 7 बातों पर जरुर ध्यान दे

1. फंड मैनेजर का ट्रैक रेकॉर्ड पर ध्यान दें ( Fund Manager Track Record)

जब हम कोई म्युचुअल फंड को चुनने कि बात करते हैं तब सबसे पहले हमें जो भी फंड को कोई मैनजर चलाता है तो उसका Track Record को देखना बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि फंड में क्या बदलाव करने हैं फंड में से कब किस सेक्टर अथवा शेअर कंपनी को निकालना है या उसमें ऐंड करना है यह सब पुरी तरह फंड मैनेजर के किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना साथ में ही होता है, इसलिये इबसे पहले इसे पुरी तरह जांच ले.

2. डियवरसिफिकेशन से रिस्क कम होता हैं (Diversification Risk Minimise)

इसका मतलब जो भी फंड होता है वह किस अलग-अलग सेक्टर में इसको Include किया गया हैं? मतलब बैंकिंग सेक्टर, फार्मा सेक्टर, रियालीटी प्रोपर्टी सेक्टर ऐसे कितने अलग अलग सैक्टर में फंड द्वारा निवेश किया गया हैं, क्योंकी अगर एक हि सेक्टर पर सारा फंड डिपेंड होता है तो किसी न्युज के कारण या मंदी के कारण इसमें अचानक गिरावट आती है तो आपका निवेश में आपको बहुत छोटा सहन करना पड़ेगा इसलिए अगर एक से अधिक सेक्टर हो तो अगर एक किसी कारण वश नीचे भी जाता है तो बाकी सेक्टर उसे बैलैंन्स कर देंगे और आपको ओवरऑल प्रोफिट हि होगा.

3. फंड के रोलिंग रिटर्न देखना है जरुरी (Mutual Fund Rolling Returns)
ज्यादातर लोग जब म्यूचुअल फंड पर ध्यान देते हैं तो वह सिर्फ 1 या 2 साल कि ही रिटर्न्स देखते हैं और वह अच्छा या बुरा इस नतिजे पे आते हैं लेकिन इससे हम गलत जगह पर इन्वेस्टमेंट कर सकते हैं क्योंकि आजकल ज्यादातर फंड मैनेजर या कंपनीया अपने फंड का बहुत हि अच्छे तरिके से मार्केटिंग करती हैं,और एक साल में कुछ जुगाड करके अच्छे रिर्टन्स लाते हैं और उसी एक साल के रिटर्न्स को दिखाकर ग्राहकों को लुभाया जाता हैं, आजकल बहुत काॅपिटेशन कि वजह से लोग सिर्फ एक या दो साल के Quarterly Returns Result को देखकर फंड का Good हैं या Bad हैं इस नतिजे पे पोहच जाते हैं, लेकिन हमें इसके बदले Rolling Returns Observed करना चाहियें मतलब इसमें हम साल या दोसाल कि बजह आजतक के रिटर्न्स को 5 -5 सालो में डिवाइड करतें हैं. इससे हि हम कंपनी के रिकाॅर्ड को अच्छी तरह से जान सकते हैं.
अगर म्युचुअल फंड सही में अच्छा है तो Long Term Rolling Returns भी अच्छे होंगे, तब आप उसमे Investment कर सकते हों. अगर आप इन्वेस्टमेंट के ऊपर अधिक जानकारी चाहते है तो हमारा इन्वेस्टमेंट कहा करनी चाहिये यह ब्लाॅग अवश्य पढ़ सकते हैं.

4. एएमसी ट्रॅक रेकाॅर्ड को जानें ( Company AMC Track Record)

म्युचुअल फंड चुनते समय में AMC Track Record का चेक करना भी बहुत जरुरी होता हैं, अगर एक कंपनी हैं और वह 10 फंड चलाती है तो हमें एक कि बजह वो 10 Fund कैसे चल रहे हैं सारे फंड ने हर साल कितने रिटर्न्स दिये हैं यह सब जानना होगा, क्योंकी कईबार क्या होता हैं कि किसी कंपनी का एक ही फंड ने Quarterly Returns ज्यादा दिये होते हैं तो वह उसे ही फोकस करती है ना कि बाकी फंड पे और हम मार्केटिंग से प्रभावित होकार ऐसी कंपनीयों में निवेश करते हैं बिना जादा सोचे हुयें तो हमें ऐसा नहीं करना हैं.
किसी एक फंड को देखने कि बजह हम अगर पुरी AMC Track Record Analysis करें तो हमें Long term Investment Profit या Money Returns मिल सकते हैं.

5. म्युचुअल फंड कि हिस्ट्री देखना जरुरी (Mutual Fund History)
अगर आप कोई भी में Mutual Fund Investment करने कि सोचते हो तो कम से कम उसकी 6 या 7 साल कि रेकाॅर्ड उपलब्ध होनी चाहिये तभी उसमें इन्वेस्टमेंट करें.
कई बार लक कि वजह से या तो किसी अन्य कारणों से एक साल के रिटर्न्स ज्यादा आते हैं तो हम उसी साल के Returns को देखकर उससे प्रभावित होते हैं ऐसा हमें नहीं करना चाहिये बहुत बार कंपनीया मर्ज होती है की बार नाम Mutual Fund Name Change किया जाता है, या तो नया नया फंड Launch हुआ होता हैं तो ऐसे में इससे प्रभावित ना हों कम से कम 6-7 सारे के रेकाॅर्ड होनेवाले फंड का विचार करना बेहतर होगा.

6. कम एक्सपेंन्स रेशों वाले फंड चुने ( Low Expense Ratio)

एक बात ध्यान रखें कि जितना कम फंड रेशों होगा उतना हि कम राशी आपकी आपके निवेश से Fund Manager या Mutual Fund Company को जायेंगी और उतना ही ज्यादा निवेश आपका फंड में लगेगा तो जितना Low Expense Ratio होगा उतना आपके लिये अच्छा होगा.

7. पोर्टफोलियो टर्नओवर रेशों भी जांच लें ( Portfolio Turn Over)
कई बार अचानक से Portfolio Turn Over Increase हो जाता है यह अक्सर तभी होता है जब फंड मॅनेजर या Filund manager Team Change कर दि जाती है तो वह अपने तरिके से स्टाॅक या सेक्टर में बदलाव करते हैं तभी ऐसा होता या , की बार किसी और फंड को या Scheme को Merge किया जाता है या Mutual Fund Reclassification हो जाता हैं, ऐसे में Mutual Fund Portfolio TurnOver अचानक से बढ़ रहा है तो आपको अलर्ट हो जाना होगा कि कुछ तो हो रहा है फंड में ऐसे में आपको इसका भी बखुबी से ध्यान रखना होगा जब आप म्युचुअल फंड को चुनने जाते हों तो.
तो अगर आप इन 7 बातों को ध्यान रखते हो तो तो आपको बेस्ट म्युचुअल फंड 2021 चुनने के लिये कोई भी परेशानी नहीं रहेगीं.
अगर आपको यह आर्टिकल Best Mutual fund Kaise Chune Hindi 2021 कैसा लगा ?अगर अच्छा लगा तो यह आर्टिकल को अपने मित्रों से जरुर साझा करें.और कोई सवाल और सुझाव हो तो हमें अवश्य लिखें.

निवेश कर अमीर बनने के ये हैं 10 बेहतरीन विकल्प

सचाई यह है कि कम जोखिम के साथ बेहतरीन रिटर्न नहीं कमाया जा सकता. वास्तव में जहां रिटर्न अधिक होगा, वहां जोखिम भी अधिक होगा.

निवेश कर अमीर बनने के ये हैं 10 बेहतरीन विकल्प

निवेश के किसी विकल्प को चुनते वक्त आपको जोखिम उठाने की अपनी क्षमता के बारे में जानना-समझना जरूरी है. कुछ निवेश ऐसे हैं जिनमें लंबी अवधि में अधिक जोखिम के साथ अधिक रिटर्न का मौका मिलता है.

निवेश के वास्तव में दो तरीके हैं-वित्तीय और गैर वित्तीय निवेश विकल्प.

इसे भी पढ़ें: कैसे ट्रांसफर करें PPF अकाउंट?

वित्तीय प्रोडक्ट में आप शेयर बाजार से संबद्ध विकल्प (शेयर, म्यूचुअल फंड) चुन सकते हैं या फिक्स्ड इनकम (PPF, बैंक FD आदि) के विकल्प चुन सकते हैं. गैर वित्तीय निवेश विकल्प में सोना, रियल एस्टेट आदि आते हैं. ज्यादातर भारतीय निवेश अब तक निवेश के इसी गैर वित्तीय निवेश विकल्प का प्रयोग करते रहे हैं.

हम आपको यहां बता रहे हैं निवेश के शीर्ष 10 विकल्प:

शेयरों में निवेश
हर किसी के लिए शेयरों में सीधे निवेश करना आसान नहीं है. इसमें रिटर्न की कोई गारंटी भी नहीं है. सही शेयरों का चुनाव मुश्किल काम है, इसके साथ ही शेयर की सही समय पर खरीदारी और सटीक वक्त पर निकलना महत्वपूर्ण है. निवेश के अन्य विकल्पों की तुलना में शेयर में लंबी अवधि में रिटर्न देने की क्षमता सबसे अधिक होती है.

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इक्विटी म्यूचुअल फंड
म्यूचुअल फंड की यह कैटेगरी शेयरों में निवेश से ही रिटर्न कमाती है. सेबी के निर्देश के मुताबिक जो म्यूचुअल फंड स्कीम अपने फंड का 65% शेयरों में निवेश करती है, वह इक्विटी म्यूचुअल फंड कहलाती है. इसमें एक फंड मैनेजर होता है जो पर्याप्त रिसर्च के बाद निवेश के लायक शेयर चुनता है और उसमें निवेश करता है.

इक्विटी स्कीम बाजार पूंजीकरण या सेक्टर के हिसाब से अलग हो सकती हैं. इस समय इक्विटी म्यूचुअल फंड का एक, तीन या पांच साल का रिटर्न 15फीसदी सालाना के हिसाब से रहा है.

डेट म्यूचुअल फंड
म्यूचुअल फंड की यह कैटेगरी उन निवेशकों के लिए सही है जो निवेश से गारंटीड रिटर्न कमाना चाहते हैं. ये म्यूचुअल फंड कॉरपोरेट बांड्स, सरकारी सिक्योरिटीज, ट्रेजरी बिल्स, कमर्शियल पेपर आदि में निवेश से रिटर्न कमाती है. इस समय डेट म्यूचुअल फंड का एक, तीन या पांच साल का रिटर्न 6.5, 8 और 7.5 फीसदी सालाना के हिसाब से रहा है.

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)
नेशनल पेंशन सिस्टम (nps) का प्रदर्शन पिछले कुछ सालों में अच्छा रहा है. बहुत कम फीस स्ट्रक्चर भी इसे निवेश का आकर्षक विकल्प बनाता है. बाजार से जुड़े उत्पादों में देश में यह सबसे कम खर्च वाला प्रोडक्ट है. निकासी संबंधी नियमों में बदलाव और अतिरिक्त टैक्स-छूट की वजह से भी यह निवेशक की पसंद में शामिल हो गया है.

एनपीएस बच्चों की शिक्षा, शादी, घर बनाने या किसी मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में आंशिक निकासी की सुविधा देता है. इसमें हालांकि रिटायरमेंट के बाद भी आपको निवेश में बने रहना जरूरी होता है. यह वास्तव में शेयर, FD, कॉरपोरेट बांड, लिक्विड फंड और सरकारी निवेश विकल्प का मिला जुला रूप है.

इस समय NPS का एक, तीन या पांच साल का रिटर्न 9.5, 8.5 और 11 फीसदी सालाना के हिसाब से रहा है.

पीपीएफ
देश में निवेशकों के बीच पीपीएफ सर्वाधिक लोकप्रिय बचत योजनाओं में से एक है. इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 80C के तहत किसी एक वित्त वर्ष में आप पीपीएफ में 1.5 लाख रुपये के निवेश पर टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं.

निवेश के इस विकल्प की सबसे अच्छी बात यह है कि यह आपको EEE (निवेश के वक्त करमुक्त, ब्याज पर करमुक्त, निवेश भुनाने पर करमुक्त) का लाभ देता है.
निवेश के इस विकल्प में सरकारी गारंटी इसकी लोकप्रियता को और बढ़ा देती है.

बैंक FD
बैंक या पोस्ट ऑफिस में कराई जाने वाली टैक्स सेविंग FD से आप निवेश के वक्त सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचा सकते हैं. यह निवेश का सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न वाला विकल्प है. इस पर मिलने वाले ब्याज पर आपको इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना पड़ता है.

डिपाजिट इंश्योरेंस एवं क्रेडिट गारंटी कॉर्पोरेशन के हिसाब से आपकी एक लाख रुपये तक की जमा रकम बीमित है.

सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम (SCSS)
पोस्ट ऑफिस की तरफ से बेस्टसेलर के रूप में यह स्कीम रिटायर्ड लोगों के लिए निवेश का पसंदीदा स्रोत है. यह सेवानिवृत लोगों के लिए आय का नियमित स्रोत भी है. इस स्कीम की अवधि पांच साल है जिसे तीन साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है.

इसमें हालांकि प्रति व्यक्ति 15 लाख रुपये की अधिकतम निवेश सीमा है. यह 60 साल से अधिक उम्र के निवेशकों के लिए ही खुली है, हालांकि सेना किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना से रिटायर मेंट लेने वाले लोगों के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं है.

विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन भर की बचत को पार्क करने और उस पर कमाई के हिसाब से यह स्कीम बेहतरीन है. यह सेवानिवृत लोगों की जरूरत के हिसाब से बनाया गया है.

रिजर्व बैंक के टैक्सेबल बांड्स
पहले इस स्कीम में आठ फीसदी सालाना का ब्याज मिलता था जिसे सरकार ने बदल कर अब 7.75 फीसदी ब्याज वाला विकल्प बना दिया है. इस बांड में पांच साल के लिए निवेश किया जा सकता है.

रियल एस्टेट
खुद के रहने के हिसाब से घर खरीदना अब निवेश के लिहाज से भी आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. अगर आपको रहने की जरूरत नहीं है तो आप निवेश के हिसाब से भी दूसरा घर खरीद सकते हैं. निवेश के इस विकल्प में आपको सिर्फ प्रॉपर्टी की लोकेशन और वहां मौजूद सुविधाओं का ध्यान रखने की जरूरत है.

इसमें निवेश से आप पूंजी में इजाफा और किराये से किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना आमदनी, दो तरीके से रिटर्न कमा सकते हैं.

सोना
निवेश का यह विकल्प सदियों से भारतीयों की पसंद में शामिल है, पहनने के लिए खरीदी जाने वाली ज्वेलरी से लेकर निवेश के रूप में खरीदे गए सिक्के और बार तक, सोना बिना किसी संदेह के भारतीयों की पसंद में सबसे ऊपर है. अब आप पेपर गोल्ड के रूप में भी सोने में निवेश कर सकते हैं.

गोल्ड ETF में निवेश करना और भुनाना दोनों ही शेयर बाजार के जरिये होता है.

आप क्या करें
निवेश के कुछ विकल्प शेयर बाजार से संबद्ध हैं तो कुछ निश्चित ब्याज वाले हैं. आप जोखिम लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से ही रिटर्न की उम्मीद रखें.

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सलाह: इन 11 पैरामीटर पर करें शेयरों का चुनाव, मिलेगा 100% से 500% तक का तगड़ा रिटर्न

किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वह किस सेक्टर की कंपनी के शेयर है और उसका कारोबार क्या है यह पता करें। इसके बाद उस कंपनी की बैलेंस सीट, टर्नओवर, बिजनेस मॉडल और कंपनी का भविष्य क्या है आदि की जानकारी जुटाएं।

Edited by: Alok Kumar @alocksone
Updated on: January 17, 2022 13:17 IST

शेयरों का चुनाव- India TV Hindi

Photo:INDIA TV

Highlights

  • कंपनी की कुल शुद्ध लाभ और उसके शेयरों की संख्या से विभाजित करके ईपीएस हासिल किया जा सकता है
  • आरओई रेश्यो आपको बताता हैं की कंपनी अपने इक्विटी पर कितना पैसा या रिटर्न बना रही है
  • किसी शेयर का चुनाव करते समय उस कंपनी के पिछले 5 सालों के डिविडेंड भुगतान का रिकॉर्ड जरूर देखें

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच शेयर बाजार ने बीते दो साल में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। इसके चलते डीमैट खातों की संख्या दो करोड़ से बढ़कर 7.5 करोड़ से अधिक हो गई है। ऐसे में अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करते हैं और सही स्टॉक का चुनाव नहीं करने के कारण नुकसान में है तो हम आपको सही शेयर के चुनाव के लिए 11 टिप्स दे रहे हैं। इनको फॉलो कर आप न सिर्फ अपना जोखिम कम कर पाएंगे बल्कि 100% से 500% तक का तगड़ा रिटर्न वाले शेयर किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना का चुनाव भी आसानी से कर पाएंगे।

1. निवेश से पहले EPS के गणित को समझें

EPS का मतलब होता है कि कंपनी के नेट प्रॉफिट में से कंपनी के प्रत्येक शेयर का हिस्सा। EPS का सीधा संबंध कंपनी के लाभ से होता है। अगर EPS अच्छा है तो इसका मतलब है कि कंपनी अच्छा मुनाफा कमा रही है। आप EPS को वार्षिक या मासिक आधार पर जरूर देंखे। इसका कलकुलेशन बहुत ही आसान है। कंपनी की कुल शुद्ध लाभ और उसके शेयरों की संख्या से विभाजित करके ईपीएस हासिल किया जा सकता है।

2. P/E Ratio देखना कभी भी न भूलें

P/E यानी Price to Earning Ratio। इस रेश्यो को कंपनी के 1 शेयर की मार्केट कीमत में EPS का भाग देकर निकाला जाता है। अगर किसी कंपनी का EPS 10 रुपयेे प्रति शेयर हैं। अगर कंपनी के शेयर का भाव 200 रुपये है तो कंपनी का P/E Ratio 20 होगा। इसका मतलब हुआ की आपको एक वर्ष में 10 रुपये कमाने के लिए 20 गुना पैसे देने होंगे। अतः आपको एक शेयर के लिए 200 रुपये देने होंगे।

3. RoE और RoCE को समझना बहुत जरूरी

दोनों रेश्यो किसी भी कंपनी के शेयर का चुनाव करते समय सबसे महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यह रेश्यो आपको बताते हैं की लगाई हुई इक्विटी या कैपिटल पर कितना रिटर्न प्राप्त हो रहा हैं। आरओई रेश्यो आपको बताता हैं की कंपनी अपने इक्विटी पर कितना पैसा या रिटर्न बना रही है। आसान भाषा में समझे तो कंपनी के लगाए पैसे पर कितना पैसा बन रहा हैं।

4. तुक्का न लगाएं, ट्रेडिंग कोई जुआ नहीं

पहली बार बाजार में पैसा लगाने वाले या नए निवेशक शेयर को तुक्का का खेल समझते हैं, जबकि ठीक उलट शेयर में निवेश एक रणनीति की मांग करता है। आप किस कंपनी का शेयर खरीद रहे हैं, उसकी मार्केट में स्थिति कैसी है, पिछले कुछ समय से उसकी शेयर बाजार में क्या स्थिति रही है आदि की जानकारियां एक निवेशक को होनी चाहिए। सिर्फ कम कीमत देखकर जुए के खेल की तरह शेयर खरीदना और उससे लाभ की उम्मीद लगाना आपको भारी नुकसान करा सकता है।

5. कंपनी के ऊपर कर्ज का आकलन

शेयर मार्केट में शेयर चुनते समय कंपनी के ऊपर कितना कर्ज यह जरूर देखना चाहिए। अगर किसी कंपनी के ऊपर ज्यादा कर्ज हैं तो उसे बहुत ज्यादा ब्याज होगा। इसलिए आप जिस शेयर में इन्वेस्टमेंट कर रहे हो उस कंपनी के ऊपर कम से कम कर्ज होना चाहिए। एक कर्ज मुक्त कंपनी किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना को आप ज्यादा तवज्जो देना चाहिए। एक निवेशक के तौर पर आप कंपनी का Debt-Equity Ratio देख सकते हैं। Debt-Equity Ratio अगर 1 से कम हो तो अच्छा माना जाता है। यह रेश्यो अगर जीरो हो तो यह एक आदर्श रेश्यो माना जाता हैं।

6. कंपनी द्वारा लाभांश भुगतान का रिकॉर्ड

जिन कंपनियों की वित्तीय हालत अच्छी होती है और लाभ कमाती हैं। वह अपने शेयर होल्डर्स को लाभांश का भुगतान करती है। शेयर की प्राइस में इजाफे के साथ-साथ नियमित आय के रूप में डिविडेंड को भी महत्व देना चाहिए। किसी शेयर का चुनाव करते समय उस कंपनी के पिछले 5 सालों के डिविडेंड भुगतान का रिकॉर्ड देखें।

7. मजबूत मैनजमेंट का चयन

किसी भी कंपनी का मैनेजमेंट उस कंपनी की आत्मा माना जाता है। एक अच्छा मैनेजमेंट कंपनी के भविष्य को अधिक उज्जवल बना सकता है जबकि अक्षम मैनेजमेंट अच्छी कंपनी को भी नीचे की ओर ला सकता है। इसलिए आप Share Select करते समय कंपनी के मैनेजमेंट के बारे में सही जानकारी जरूर हासिल करें।

8. शेयर बाइबैक का रिकॉर्ड चेक करें

शेयर चुनने से पहले Share Buyback के बारे में जानकारी लें। अगर प्रमोटर स्वयं की कंपनी के शेयर पब्लिक से वापस खरीद रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें कंपनी के बिजनेस मॉडल में विश्वास है और भविष्य में कंपनी के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद हैं। इसके साथ ही कंपनी की शेयर होल्डिंग पैटर्न चेक करें। किसी कंपनी का शेयर होल्डिंग पेटर्न यह दिखाता है कि कंपनी के शेयर किन-किन व्यक्तियों के पास हैं? इसमें आपको देखना है कि शेयर का कितना हिस्सा प्रमोटर्स के पास हैं। प्रमोटर्स के पास जितना अधिक शेयर का हिस्सा होगा, उतना ही अच्छा माना जाता है।

9. कंपनी और सेक्टर जरूर देंखे

किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले वह किस सेक्टर की कंपनी के शेयर है और उसका कारोबार क्या है यह पता करें। इसके बाद उस कंपनी की बैलेंस सीट, टर्नओवर, बिजनेस मॉडल और कंपनी का भविष्य क्या है आदि की जानकारी जुटाएं। किसी एक शेयर या किसी एक सेक्टर पर निवेश करना इससे आपको एक आइडिया मिल जाएगा कि कौन सी कंपनी सही है या किसकी वित्तीय स्थिति कमजोर है। किसी भी सेक्टर की लीडर कंपनी पर प्रमुखता से ध्यान देना चाहिए।

10. लंबी अवधि के लक्ष्य लेकर शेयर चुनें

किसी भी शेयर में छोटी अवधि में रिटर्न की उम्मीद नहीं करें। हमेशा लंबी अवधि का लक्ष्य बनाकर निवेश करें। ऐसी कंपनी के शेयर चुनें जिसमें रिटर्न ज्यादा मिले, लेकिन रिस्क कम हो। ऐसे निवेश से बचें जिसमें या तो बहुत बढ़िया रिटर्न मिलेगा या फिर भयंकर नुकसान की संभावना है।

11. ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयर चुनें

हमेशा वैसे शेयर का चुनाव करें जिसमें ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यम हो। विश्‍लेषक अक्‍सर ज्यादा ट्रेडिंग वॉल्यूम वाले शेयरों की समीक्षा करते हैं। कम ट्रेड किए जाने वाले शेयरों में नकली तेजी लाई जा सकती है। बड़े शेयरों में इसकी गुंजाइश बहुत नहीं होती है।

Stocks vs Mutual Funds: निवेशक को कहां करना चाहिए निवेश जिससे मिले ज्यादा रिटर्न

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड लक्ष्य आधारित निवेश है. इसमें आपको पता है कि सालाना आधार पर अमूमन कितना रिटर्न मिलेगा. लॉन्ग टर्म में यह मल्टीबैगर साबित होता है.

Stocks vs Mutual Funds: निवेशक को कहां करना चाहिए निवेश जिससे मिले ज्यादा रिटर्न

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए इन्वेस्टमेंट स्कीम का रिटर्न महंगाई के मुकाबले ज्यादा होना चाहिए. वर्तमान में महंगाई दर 5-6 फीसदी के बीच है. ऐसे में अगर निवेश के परंपरागत साधनों में निवेश करते हैं तो नेट रिटर्न कम होगा. म्यूचुअल फंड में आपका पैसा शेयर बाजार में भी निवेश होता है जिसके कारण रिटर्न ज्यादा मिलता है और आपका नेट रिटर्न ज्यादा होगा.

TV9 Bharatvarsh | Edited By: शशांक शेखर

Updated on: Feb 08, 2022 | 8:17 AM

निवेशकों (Investors) के मन में एक सवाल बार-बार आता है कि उन्हें म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेश करना चाहिए या फिर शेयर बाजार (Share market investment) में निवेश करना चाहिए. शेयर बाजार में निवेश का मुख्य रूप से दो तरीका है. पहला- खुद शेयर खरीदें और बेचें. दूसरा तरीका है कि म्यूचुअल फंड के जरिए शेयर बाजार में निवेश करें. निवेश का दोनों तरीका अच्छा है, अंतर बस इतना है कि डायरेक्ट शेयर खरीदने पर फायदे और नुकसान दोनों के लिए आप खुद जिम्मेदार होंगे. यह आपको तय करना है कि बाजार में कब एंट्री लेनी है, कौन सा शेयर खरीदना है, कितने दिन के लिए निवेश करना है. अगर म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं तो फंड मैनेजर आपके बदले ये तमाम फैसले लेता है.

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप भी शेयर बाजार की जानकारी रखते हैं. स्टॉक मार्केट पर आपकी अच्छी पकड़ है तो बाजार में डायरेक्ट निवेश करने पर कई गुना रिटर्न कमाया जा सकता है. अगर आप किसी के सलाह पर बाजार में निवेश करते हैं इससे कमाई भी होती है तो इन्वेस्टमेंट का यह तरीका ठीक नहीं है. ऐसे लोगों को म्यूचुअल फंड में इक्विटी स्टॉक्स में निवेश करना चाहिए जहां शानदार रिटर्न मिलता है. म्यूचुअल फंड के मैनेजर काफी स्किल्ड होते हैं. उन्हें पता होता है कि पोर्टफोलियो किस तरह डिजाइन करना है. किस सेक्टर में, किस कंपनी में कितना निवेश करना चाहिए, उन्हें इसकी पूरी जानकारी होती है.

पोर्टफोलियो डायवर्सिफाइड रखें

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की सलाह होती है कि पोर्टफोलियो को हमेशा डायवर्सिफाइड रखें. इससे रिस्क कम रहता है. पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइड रखने से रिस्क फैक्टर घटता है. बाजार में किसी तरह की हलचल का आपके इन्वेस्टमेंट पर कम असर होता है. कोई इंडिविजुअल जब किसी खास सेक्टर के खास स्टॉक में निवेश करता है तो उसका रिस्क ज्यादा होगा. वहीं, म्यूचुअल फंड में आपके पैसा अलग-अलग सेक्टर के अलग-अलग स्टॉक्स में निवेश किया जाता है. इस तरह सेक्टर डायवर्सिफिकेशन के साथ-साथ स्टॉक डायवर्सिफिकेशन का भी लाभ मिलता है.

सही स्टॉक सलेक्शन पर मल्टीबैगर रिटर्न

निवेशकों को इस बात को समझना चाहिए कि अगर आप खुद से शेयर बाजार में निवेश करते हैं तो राइट स्टॉक पिक होने पर आपको मल्टीबैगर रिटर्न मिल सकता है. लेकिन, म्यूचुअल फंड आपको इतने कम समय में मल्टीबैगर रिटर्न नहीं देगा. हालांकि, इस बात को भी ध्यान में रखना चाहिए कि खुद से निवेश करने पर आपका इन्वेस्टमेंट कई गुना घट भी सकता है, म्यूचुअल फंड के साथ ऐसा नहीं होता है. आसान शब्दों में खुद से निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न के साथ ज्यादा रिस्क भी जुड़ा है. म्यूचुअल फंड बैलेंस्ड रिटर्न के साथ-साथ बैलेस्ड रिस्क का भी भरोसा देता है.

म्यूचुअल फंड लक्ष्य आधारित निवेश

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि म्यूचुअल फंड लक्ष्य आधारित निवेश है. इसमें आपको पता है कि सालाना आधार पर अमूमन कितना रिटर्न मिलेगा. लॉन्ग टर्म में यह मल्टीबैगर साबित होता है. इसमें निवेश करने के बाद आपका एक्टिव रहना जरूरी नहीं है. खुद से बाजार में निवेश करने पर उस स्टॉक और सेक्टर के बारे में अपडेटेड जानकारी जरूरी है. अगर आप शेयर बजार में ट्रेडिंग करते हैं या फिर इसकी बारिकी को समझना चाहते हैं तो समय के साथ निवेश का तरीका सीखा जा सकता है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स अनुभव लेने के बाद ही बाजार में खुद से निवेश की सलाह देते हैं.

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