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प्रसार कम है

प्रसार कम है
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बिना Internet और सब्सक्रिप्शन के मोबाइल पर सीधे उठाएं LIVE TV का मजा, देखें अपना पसंदीदा TV Show

Direct 2 Mobile

Direct 2 Mobile : हमारी जिन्दगी में लगातार बढ़ रही स्मार्टफोन की दखल, अब धीरे-धीरे हमारे लाइफस्टाइल का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है. स्मार्टफोन की सहायता से अब हम अपने दैनिक कार्यों को बड़ी सहजता के साथ कर सकते है. स्मार्टफोन का दखल अब हमारे दैनिक दिनचर्या के लिए अति महत्वपूर्ण घटक हो चुका है. स्मार्टफोन के उपयोग से हम अपने कई जटिल और बड़े कामों का सरलता के साथ घर पर ही बैठ कर निदान कर लेते है. आजकल स्मार्टफोन ही हमारा अख़बार और स्मार्टफोन ही हमारा टेलीविजन बन चुका है. अब खबरों और वीडियो के लिए हम स्मार्टफोन का ही उपयोग करते हैं. लेकिन इसके लिए हमें कई तरह की दिक्क़तो का सामना भी करना पड़ता है. जैसे, लाइव टीवी के लिए हमें कई प्रकार के OTT प्लेटफार्म का सब्सक्रिप्शन और हाई स्पीड डाटा की आवश्यकता पड़ती है.

बिना इंटरनेट के देखें लाइव टीवी

वीडियो स्ट्रीमिंग लाइव वीडियो के लिए हम कई प्रकार के OTT प्लेटफार्म का सब्सक्रिप्शन लेते है, और इनको चलाने के लिए का उपयोग करते हैं. इन चीजों के लिए हम आवश्यकता से अधिक पैसे भी खर्च कर देते हैं. लेकिन अब हमारी इन सभी जरूरतों को कम पैसे में देने के लिए हमारी सरकार नई टेक्नोलॉजी तैयार कर रही है. इस नई टेक्नोलॉजी की मदद से आप बिना इंटरनेट के लाइव टीवी देख सकेंगे. जी हाँ, अपने प्रसार कम है सही सुना सरकार एक ऐसे टेक्नोलॉजी को एक्सप्लोर कर रही है, जिसकी मदद से यूजर्स बिना इंटरनेट के लाइव टीवी देख सकेंगे. इस टेक्नोलॉजी का नाम है Direct 2 Mobile सेवा.

क्या है Direct 2 Mobile सेवा?

इसका शॉर्ट नाम है D2M सेवा. यह सुनने में भले काफी हद तक डायरेक्ट टूम होम जैसा लग रहा हो पर यह उससे बिल्कुल अलग है. इस सर्विस की मदद से सरकार लोगों को फेक न्यूज से बचने, इमरजेंसी अलर्ट और प्राकृतिक आपदा समेत दूसरे कई काम करने की योजना बना रही है. ये टेक्नोलॉजी पूरी तरह से FM रेडियो वाले कॉन्सेप्ट पर काम करती है, जो एक रिसीवर की मदद से रेडियो फ्रिक्वेंसी को एक्सेस करती है. इस टेक्नोलॉजी के मदद से आप सीधे ब्रॉडकास्ट स्प्रेक्ट्रम के जरिए मोबाइल पर टीवी चैनल देख सकेंगे. इसके लिए आपको 4G और 5G स्प्रेक्ट्रम की जरूरत नही पड़ेगी.

यह कैसे काम करेंगी?

फिलहाल DoT इस पर एक स्टडी कर रहा है. जिससे यह टेक्नोलॉजी ब्रॉडकास्ट सर्विस को सीधे यूजर्स के स्मार्टफोन पर स्पेक्ट्रम बैंड की मदद से पंहुचा सके. इस संबंध प्रसार कम है में IIT कानपुर ने प्रसार भारती के साथ एक समझौता (MoU) भी साइन कर लिया है. इसके लिए जल्द ही आईआईटी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (Center of Excellence) की स्थापना की जाएगी. फिलहाल प्रसार भारती 526-582 MHz बैंड्स का इस्तेमाल इस टेक्नोलॉजी को टेस्ट के लिए कर रही है. यह टेक्नोलॉजी आपको एक बैंड पर केंद्रीत कर दी जाएगी जिसको आपका फोन रिसीव करेगा, और आप सरलता से लाइव प्रसारण का आनंद उठा पाएंगे,जैसे पहले दूरदर्शन के चैनल का प्रसारण होता था. हालांकि अभी इस टेक्नोलॉजी को यूजर्स तक पहुंचने में थोड़ा और वक्त लगेगा.

चंदौली : डीएम की मौजूदगी में कराई गई क्राप कटिंग, प्रति हेक्टेयर 69 कुंतल तक उत्पादन

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चंदौली। धान की फसल पककर तैयार है। ऐसे में कृषि प्रधान जिले में धान का औसत उत्पादन जानने के लिए जिलाधिकारी ईशा दुहन की मौजूदगी में सोमवार को सकलडीहा तहसील के बढ़वल परगना के फगुइयां गांव में क्राप कटिंग कराई गई। दो स्थानों पर कराई गई क्राप कटिंग में उत्पादन क्रमशः 62.88 कुंतल प्रति हेक्टेयर व 69.515 कुंतल प्रति हेक्टेयर अनुमानित किया गया। इस बार सूखे के बावजूद किसानों ने धान पैदा किया है। ऐसे में उत्पादन गत वर्षों की तुलना में कम है।

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फगुइया गांव में तीन किसानों के का चयन क्राप कटिंग के लिए किया गया. इसमें छन्नूलाल के खेत में त्रिभुज के मानक के अनुरूप 43.30 वर्ग मीटर में फसल की कटाई व मड़ाई कराई गई। इसमें कुल उपज 27.250 किलोग्राम पाया गया। इसके आधार पर प्रति हेक्टेयर उपज 62.88 कुंटल अनुमानित की गई। इसी प्रकार विनोद गुप्ता के खेत में रकबा 43.30वर्ग मीटर में कटाई व मड़ाई हुई। इसमें कुल उपज 30.100 किलोग्राम निकली। वहीं प्रति हेक्टेयर 69.515 कुंतल अनुमानित किया गया। इस बार मानसून सीजन में औसत से काफी कम बारिश हुई। इसकी वजह से जिले के पर्वतीय नौगढ़ इलाके में धान की खेती नहीं हो सकी। मैदानी इलाके के किसानों ने किसी तरह निजी संस्धानों के सहारे इस बार धान उपजाया है। ऐसे में मौसम की प्रसार कम है बेरुखी से भी फसल का उत्पादन कुछ हद तक प्रभावित हुआ है। इस दौरान तहसीलदार सकलडीहा डा. वंदना मिश्रा, सहायक सांख्यिकी अधिकारी मनीष जायसवाल, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी विजय कुमार सिंह, राजस्व निरीक्षक शेख कलीम व लेखपाल रामबली प्रसाद व शिवप्यारे दुबे, बीमा कंपनी के प्रतिनिधि शरद मंडवाल, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सिपाही राम आदि रहे।

IIT इंदौर का शोध-‘हरे कृष्ण’ महामंत्र के जाप से मन-मस्तिष्क को मिलती प्रसार कम है है शांति, तनाव होता है कम

इंदौर आईआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग ने एक शोध किया है। शोध के जरिए यह निष्कर्ष निकला है कि हरे कृष्ण मंत्र का 108 बार जाप करने पर मन शांत होता है साथ ही तनाव मुक्त भी रहा जा सकता है।

by WEB DESK

मध्य प्रदेश स्थित इंदौर आईआईटी के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग ने एक शोध किया है। शोध के जरिए यह निष्कर्ष निकला है कि हरे कृष्ण मंत्र का 108 बार जाप करने पर मन शांत होता है साथ ही तनाव मुक्त भी रहा जा सकता है। शोधकर्ता टीम ने इस पूरे प्रशिक्षण को करने के लिए 37 लोगों का चयन किया था और उनके मस्तिक से निकलने वाली ईईजी सिग्नल रिकॉर्ड कर उन पर शोध किया गया।

37 लोगों पर किया गया शोध

इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरी विभाग ने इन अनूठे शोध में 37 लोगों को चिन्हित किया और उन पर शोध किया। शोध के दौरान हरे कृष्ण महामंत्र जाप करवाया गया। इस दौरान शोध करने वाली टीम ने हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करने वाले व्यक्तियों का पहले मस्तिक का अवलोकन किया और उसके बाद जाप के बाद उनके मस्तिष्क का अवलोकन किया। इस दौरान जाप के बाद मस्तिष्क काफी शांत और तनावमुक्त नजर आया।

गौरतलब है कि जाप के पहले और बाद में 90-90 सेकंड तक समान अवस्था में मस्तिष्क के सिग्नल रिकॉर्ड किए गए। शोध टीम के प्रमुख डॉ रामविलास पंचोरी के अनूसार दिमाग से मुख्यत: पांच प्रकार के सिग्नल निकलते हैं। इनमें अल्फा फ्रीक्वेंसी बैंड शांति और सकून के परिचायक होते हैं। बीटा फ्रीक्वेंसी बैंड चिंता—तनाव प्रदर्शित करती है। जांच के बाद अल्फा बैंड की पावर बढ़ी और बीटा की पावर घटी पाई गई। बता दें कि आईआईटी इंदौर का यह शोध मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के उपचार में काफी लाभदायक साबित हो सकता है।

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